दिल्ली के मशहूर जिले अजराना नमक के गांव कालू खां और भीरू खां दो भाई रहते थे ये दोनों दिल्ली के सुप्रसिद्ध उस्ताद सीताब साहब से शिक्षा प्राप्त करने के बाद पुणे में अपने गांव अजवारे में ज्ञान बस गए और अजरादा घराने की जन्मभूमि उस्ताद हबीबुद्दीन अजरादा आए और दिल्ली घराने से दोनों के संबंध तबला वादन थे, जो एकजुट संगति करने की अपनी निजी शैली में प्रकट हुए और शामिल थे, बहुत ही प्रतिष्ठित प्राप्त की, दुर्भाग्य से बस सन 1964 ईस्वी में पक्षाघात से पीड़ित हो गए और उनके तबला वादन ने बिल्कुल ही छूट दी और एक लंबी बीमारी के बाद सन 1972 उनकी मृत्यु के बाद उनके पिता उस्ताद शंभूखां एक प्रसिद्ध विद्वान तबला वादक वादन शैली में चले गये।
अजराड़ा घराने की वादन शैली की आत्मा तो दिल्ली की है केवल उसमें बाय रूप में थोड़ा अंतर आ गया है अतः दिल्ली बज के समान यह भी मधुर और सुंदर बज है दिल्ली और आज रानी के बाद में विशेष अंतर यही है कि आज रानी के कायदे अधिकतर में तथा डगमगाते हुए चलते हैं इसमें बाय के बोलो की अधिकता रहती है यह बज में जिन बल समूह का अधिक प्रयोग किया जाता हैधाऽधे धात्रक धिनकदींगदिगिन
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