हमारी संस्कृति हमारी भाषा

हम भारतवासियों में विदेश की भाषा का या कहिए विदेशी भाषा का मुंह इतना ज्यादा है की बच्चों को छोटी सी उम्र में ही अंग्रेजी और हटाने लगते हैं उन्हें अपने भाषा से ज्यादा विदेशी भाषाओं में इंटरेस्ट चलते हैं और यह भी कहते हैं की अंग्रेजी बोलने वाले ही स्मार्ट कहे जाते हैं जन्म से ही हम जिस भाषा को बोलने में प्रयोग करते हैं उसी भाषा से हमें संस्कार मिलते हैं और वही हमारी मातृभाषा होती है और हम चाय कितने भी दुख तकलीफ में हो हमारे मुख से स्वाभाविक प्रतिक्रिया अपनी मातृभाषा में ही होती है चाहे हम किसी भी उम्र में हो व्यक्ति को या कहीं हर इंसान को अपने मातृभाषा को विशेष महत्व देना चाहिए अगर हम अपने मातृभाषा को महत्व नहीं देंगे तो कोई और आगे हमारी मातृभाषा को महत्व नहीं देगा जैसे अंग्रेजों के देश में वह अपनी मातृभाषा को ही महत्व देते हैं इस तरह हम भारतवासियों को अपने मातृभाषा हिंदी को सर्वपरी रखना चाहिए हमारी मातृभाषा में जो रस और मिठास है वह और किसी भाषा में नहीं है हम अपनी भावनाओं को अपनी भाषा के द्वारा प्रकट कर सकते हैं हमारी सारी और कुछ लोगों ने भावनाएं हमारी भाषा से प्रकट हो जाती है और कुछ लोगों ने यह भ्रम भी फैला दिया है की अपनी मातृभाषा में रहने से कोई स्कोप भी नहीं कोई भविष्य भी नहीं है इसलिए भी लोग अंग्रेजी के पीछे भागते हैं वह सोचते हैं अंग्रेजी बोलने वाला ही सफलता पा सकता ऐसा नहीं है इसलिए हमें अपने मातृभाषा को सर्वोपरि रखना चाहिए

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