कोरोना काल

आप सभी लोग जानते हैं कि यह समय कोरोना का चल रहा है सभी लोग अपने घर में बंद है यहसभी लोगों कोलगता है कि कब  पहले जैसा समय होगा और हम भी स्वतंत्र होंगे परंतु अगर आप नकारात्मक सोचेंगे तो आपके दिमाग में नकारात्मक बातें ही आएंगे जो आपको और ज्यादा परेसानकर सकती है हर कहानी के दो पहलू होते हैं पहले पहलू में सुखया दुख नजर आता है और दूसरे पहलू में भी आदमी दुखया सुखनजर आता हैइसलिए किसी भी चीज को इतना नकारात्मक रूप नहीं लेना चाहिए अगर सोचा जाए तो कोरोनाको भी आना जरुरी था क्योंकि कोरोना के कारण बहुत सारे बदलावहमारी जिंदगी में आए हैं पहला रिश्तो में बदलाव रिश्तो में बदलाव का मतलब लोग रिश्तो को हमने टाइम देने लगे हैं क्योंकि लोगों को यह समझ आ गया है कि अपने-अपने ही होते हैं जरुररत पड़ने पर सिर्फ अपने ही कामॴ सकते हैं गैरों को कितना भी अपना समझो लेकिन जब जरुरत पड़ती है तो वह अपना रूप दिखा ही देते हैं काम अपने ही आते हैं दूसरा कोरोनाकाल में इंसान अपने स्वस्थ शरीर चाहता है कहने का मतलब की अगर हमारा शरीर स्वस्थ होगा तो ही यह सारे रोगों से लड़ सकता है जब हम स्वस्थ रहेंगे तो अपने परिवारको भी स्वस्थ रख सकते हैं तीसरा कोरोना कॉल बेटी बेटे का फर्क मिटा दिया है बेटाऔर बेटी का फर्क का मतलब कोरोनायह बताया है कि जब इंसान को कोई ऐसी छुआछूत की बीमारी होती है तो उससमय न बेटी काम आती है और न बेटा काम आता है दोनों को समाज वहां जाने से मना कर देता है तो क्या उस इंसान को मोक्षप्राप्ति नहीं होती है मरने के बादजो लोग कहते हैं कि बेटे अगर मरने के बाद आग देगा तो मोक्ष मिलेगा लेकिन कोरोनाने यह सब मिटा को एकदम जड़ से ख़त्म करडाला है को रोना कालने  बनावटी जिंदगी को खत्म कर दिया बनावटी जिंदगी से मतलब लोग अपने जिंदगी को ऐसे आराम और दिखावा में ही पैसा खर्च कर रहे थे लेकिन कोरोनाने यह सब खत्म कर दिया है और इंसान को यह सिखा दिया है कि दो पैसा बचाना बहुत जरूरी है क्योंकि यह जब दुख तकलीफ होता है तो काम में नहींआताऔर कोरोना कालने इंसान को बचत करना भीसिखाया है और उसने  इंसान को दूरदर्शी बना दिया है पहले इंसान सिर्फ थोड़े समय के बारे में ही सोचता था परंतु को रोना ने इंसान को दूरदर्शी बना दिया हैऔर विशेष बात की कोरोना ने हर मनुष्य को शहर से गांव की ओर लौटा दिया है क्योंकि मनुष्य सोचता था कि हम शहर से ही दो पैसा कमा सकते हैं उसने अपनी मातृभूमि छोड़कर शहर की ओर मुंह कर लिया परंतु को रोना ने ऐसा इंसान को सबक सिखाया कि तुम अपना घर अपना जमीन मत छोड़ो वही रहते तुम कमा सकते हो और अपने परिवार को खुशी देसकते हो अब इंसान अपना घर छोड़कर शहरों में जाने के लिए 100 बार सोचेगा और भी बहुत अच्छाई है कोरोना काल की जो परिवार जो परिवार बहुत दिन से बिछड़े थे वह कोरोना का हाल में मिल गए हैं उनके घर की सारी खुशी लौट आई है अगर आप कोरोना को साकारात्मकरूप में स्वीकार करेंगे तो आप स्वस्थ भी रहेंगी और खुश भी रहेंगे बस कोरोना का हाल में अपनों का अपना और अपनों का विशेष ख्याल रखें डिस्टेंशीगबना कर रहे और मार्क्स का प्रयोग जरूर करें हाथों को सैनिटाइजर या साबुन से जरूर धोएं बस मैं इतना ही कहना चाहती हूं धन्यवाद

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